पुस्तकालय / Aesop’s Fables

केकड़ा और उसका बेटा

एक पारंपरिक कहानी

केकड़ा और उसका बेटा

एक तार्किक केकड़े ने अपने बेटे से कहा, "तुम सीधे क्यों नहीं चलते? तुम्हारी तिरछी चाल बेहद अशोभनीय है।"

"तुम खुद ही सीधे क्यों नहीं चलते?" बेटे ने जवाब दिया।

"भटका हुआ युवा," तार्किक केकड़े ने जवाब दिया, "तुम नई और अप्रासंगिक बातें पेश कर रहे हो।"

बेटे ने अपने पिता के शब्दों पर विचार किया और सीधी रेखा में आत्मविश्वास से चलने के महत्व को समझा, फिर भी वह अपने पिता की आलोचना में विडंबना को नज़रअंदाज़ नहीं कर सका। आखिरकार, दोनों केकड़े एक ही प्रकृति से बंधे थे, अपनी दुनिया को अपने ही अनूठे तरीके से नेविगेट कर रहे थे।

सीख
कहानी का नैतिक यह है कि व्यक्ति को दूसरों की कमियों की आलोचना करने के बजाय उदाहरण के द्वारा नेतृत्व करना चाहिए।

चर्चा के प्रश्न

  1. पिता केकड़ा और बेटे के बीच की बातचीत उनके रिश्ते के बारे में क्या बताती है?
  2. हम इस कहानी के नैतिक को अपने दैनिक जीवन में कैसे लागू कर सकते हैं?
  3. क्या आपको कभी ऐसा समय याद आता है जब आपने पाखंड का अनुभव किया या देखा? इसका आप पर क्या प्रभाव पड़ा?

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दूसरी भाषा में पढ़ें

शुभ रात्रि।

कल रात: लोमड़ी और सारस।